इंतेक़ाम - भाग 28

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विजय अब दिन-रात निशा के ही बारे में सोचा करता उसे निशा और अपने बच्चों की बहुत याद आती और अपने किए पर पछतावा होता,,,,वह अकेले में अपने बच्चों और निशा को याद कर रो पढ़ता था जिस धन दौलत के नशे में चूर होकर उसने अपने बीवी बच्चों को छोड़ा था, आज उस धन दौलत का नशा उसके सिर से उतर चुका था वह बस अब शकुन से अपनी जिंदगी जीना चाहता था,,,,वह चाहता था कि वह रोज ऑफिस जाए और उसकी निशा उसके लिए नाश्ता बनाए फिर वह नाश्ता कर निशा के हाथ से बना टिफिन लेकर ऑफिस