इश्क के साये में - एपिसोड 11

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एपिसोड – 11जब नाम वापस आने लगते हैंदरवाज़ा बंद होने के बादवर्कशॉप में एक अजीब-सी खामोशी भर गई थी।ऐसी खामोशीजो आवाज़ों की कमी से नहीं,यादों के बोझ से पैदा होती है।आरव वहीं खड़ा रहा।लंबे समय तक।उसे नहीं पता थाकि जो लड़की अभी-अभी गई है,वह कौन थी।लेकिन इतना ज़रूर जानता थाकि उसके जाने सेकुछ अधूरा रह गया है।उसने टूटी पेंटिंग के पास जाकरफर्श पर बिखरे रंगों को देखा।लाल।नीला।काला।काला रंग सबसे ज़्यादा फैला हुआ था—जैसे कोई सायाअब भी ज़मीन से चिपका हो।आरव ने ब्रश उठाया।बिना सोचे।उसका हाथ खुद-ब-खुद चलने लगा।कैनवस परएक चेहरा उभरने लगा।अधूरा।लेकिन जाना-पहचाना।जैसे ही उसने आँखें बनाईं—उसके सिर में तेज़