एपिसोड – 10जब दिल याद रखता हैसुबह की रौशनी धीरे-धीरे वर्कशॉप की खिड़की से अंदर उतर रही थी।धूल के कण हवा में तैर रहे थे, जैसे किसी बीती रात के राज़ अभी भी कमरे में अटके हों।आरव फर्श पर बैठा था।पीठ दीवार से टिकी हुई।आँखें खुली थीं, लेकिन उनमें कोई मंज़िल नहीं थी।उसके सामने—टूटा हुआ कैनवस।फटे हुए रंग।जैसे किसी ने यादों को ज़मीन पर बिखेर दिया हो।वह देर तक उसे देखता रहा।समझ नहीं पा रहा था कि सीने में उठ रहा यह खालीपन क्यों इतना भारी लग रहा है।“अजीब है…”उसने खुद से बुदबुदाया।“लगता है जैसे कुछ बहुत क़रीबी था…और अब