इश्क के साये में - एपिसोड 8

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एपिसोड 8: साये और सच के बीचरात आज कुछ ज़्यादा ही भारी थी।हवा में नमी थी, जैसे दीवारें भी किसी राज़ को छुपाए साँस ले रही हों।आरव अपनी वर्कशॉप में बैठा था। सामने वही पुरानी पेंटिंग—वह लड़की, जिनकी आँखें अब सिर्फ रंग नहीं थीं…उनमें सवाल थे। दर्द था। और इंतज़ार।“तुम आज खामोश हो,”आरव ने धीमे से कहा।पेंटिंग के भीतर हलचल हुई।धीरे-धीरे वह साया बाहर आया—वही खूबसूरत लड़की, आधी रौशनी, आधी अंधेरे से बनी।“क्योंकि आज सच बहुत पास है,”उसकी आवाज़ में कंपन था।आरव चौंका।“कैसा सच?”लड़की ने अपनी आँखें झुका लीं।“जिस दिन मुझे इस पेंटिंग में कैद किया गया…वह दिन मेरी मौत