उस मौलवी की मौत के बाद उसका बड़ा भाई गाँव आता है, जहाँ छुपी हुई हक़ीक़तें एक-एक करके बेनक़ाब होने लगती हैं। आमिल की मदद से ये राज़ सामने आता है कि मौलवी शैतानी अमल में मुब्तिला था, जिसकी क़ीमत मासूम जानों ने चुकाई। मगर कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती—क़ब्र से आती आवाज़ें, एक मनहूस किताब और नक़ाबपोश साया इस बात का इशारा देते हैं कि बुराई अब भी ज़िंदा है। आमिल की अचानक मौत के बाद राफ़िया की ज़िंदगी एक नए ख़ौफ़नाक मोड़ पर आ खड़ी होती है। क्या ये सब महज़ इत्तेफ़ाक़ है या किसी शैतानी खेल की इब्तिदा?