अधुरी खिताब - 68

⭐ एपिसोड 68 — “अधूरी किताब का अंतिम पन्ना”कहानी — अधूरी किताब---हवेली की छत से उतरता धुआँ अब घना हो चुका था।लाल और नीली रोशनी आपस में टकरा रही थीं—जैसे वक़्त और रूहें आख़िरी बार आमने-सामने हों।निहारिका अपनी जगह जमी खड़ी थी।उसके सामने—पहली वारिस की आत्मा,और उससे कुछ दूरी पर—वो साया…जिसने सदियों पहले अपनी ही बहन का खून किया था।अभिराज ने निहारिका का हाथ कसकर पकड़ रखा था।सिया और आर्यन साँस रोके यह दृश्य देख रहे थे।पहली वारिस की आत्मा की आवाज़ गूंज उठी—“बहुत हो चुका।अब कोई और क़ुर्बानी नहीं होगी।”साया तड़प उठा।“अगर यह ज़िंदा रही…तो मैं मिट जाऊँगा!”आत्मा ने