अधुरी खिताब - 67

⭐ एपिसोड 67 — “हवेली का ज़िंदा साया”कहानी — अधूरी किताबतहखाने में अचानक सब कुछ शांत हो चुका था।दर्पण सामान्य दिखाई दे रहा था—जैसे कुछ हुआ ही न हो।लेकिन निहारिका की साँसें तेज थीं,दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि अभिराज ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।“निहारिका… तुम ठीक हो?”निहारिका ने धीरे-धीरे सिर हिलाया,लेकिन उसके चेहरे पर सदियों का दर्द उतर आया था।“वो लड़की… उसकी आँखों में जो दर्द था, अभिराज…उसने मुझे सब दिखा दिया।”सिया ने डरते हुए कहा—“मतलब… सच यही है कि उसका भाई अब भी जिंदा है?छाया बनकर?”आर्यन बोला—“छाया भले हो, पर ज़िंदा होना… ये सबसे डरावना