अधुरी खिताब - 66

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⭐ एपिसोड 66 — “दर्पण की खामोश चीखें”कहानी — अधूरी किताबतहखाने का कमरा दर्पण की लाल रोशनी से पूरी तरह घिर चुका था।हवा इतनी ठंडी हो गई थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था।निहारिका दर्पण के बिल्कुल सामने खड़ी थी—उसकी आँखों में डर नहीं…बल्कि एक फैसला साफ़ दिखाई दे रहा था।दर्पण में वही लड़की…पहली वारिस की बहन—अब धीरे-धीरे अपनी उंगलियाँ निहारिका की ओर बढ़ा रही थी।जैसे दोनों के बीच सदियों का रिश्ता अब पूरा होने वाला हो।अभिराज तुरंत निहारिका के पास आकर बोला—“ज्यादा पास मत जाना!ये दर्पण तुम्हें निगल भी सकता है!”निहारिका धीरे से बोली—“अगर मेरा सच इसके