अधुरी खिताब - 65

⭐ एपिसोड 65 — “किस्मत का दर्पण और मरता हुआ सत्य”कहानी — अधूरी किताबकमरा धुएँ और ठंड की धड़कती हुई परतों से भर चुका था।अधूरी किताब का पन्ना अपनी जगह थम गया था, मानो उसने वो सब कह दिया थाजो सदियों से दफन था।लेकिन हवेली शांत नहीं हुई—वो और ज़्यादा बेचैन हो चुकी थी।निहारिका ज़मीन पर बैठी थी,उसके काँधे का लाल निशान अब किसी जलते अंगारे जैसा था।जैसे उसकी हर साँस हवेली की नसों को छू रही हो।अभिराज उसके पास आया और धीरे से बोला—"उठो निहारिका…तुम्हें दर्द में देखना मुझे अच्छा नहीं लगता।"उसकी आवाज़ में पहली बार डर था,और निहारिका