एपिसोड 62 — “दिल की दस्तकें और अनकहे डर” सुबह हल्की धूप खिड़की पर फैल चुकी थी।पर रिया की आंखों में रात का जहर अभी भी बाकी था—उलझन, डर, बेचैनी… और कहीं गहरे छुपी एक टीस, जिसका नाम वह खुद नहीं जानती थी।वह आईने के सामने खड़ी थी, पर उसे अपना ही चेहरा अजनबी लग रहा था।“मैं अयान को क्यों समझ नहीं पाती… और खुद को भी?”उसने आईने में खुद से पूछा।धीरे-धीरे वह कॉलेज की तरफ निकली—लेकिन कदम उस रास्ते पर जाने से डर रहे थे जहाँ अयान का सामना होना तय था।--- कॉलेज का कोना — जहाँ धड़कनें