यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई ( 47)

                    : : प्रकरण - 47 : :          दिवाली के धमाकेदार फटाखे से  सुंदर की आँखों को बड़ा झटका लगा था. उस की आँखे टेढी हो गईं थी. वह तो ओपरेशन से ठीक हो गईं थी. लेकिन उस की आँखों की नस तंग हो गईं थी. ललिता पवार के पूर्वजों पर अभिशाप था, कोई कुदरती प्रकोप था. जिस की वजह से ना जाने कभी ना देखी, ना सुनी बीमारी. घर में किसी ना किसी भरख लेती थी.      अंधापन इस परिवार के लिये एक उपहार बन