यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (46)

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                     : :  प्रकरण - 46 : :         गोवेर्धन राय त्रिपाठी में उपन्यास ' सरस्वती चंद्र' लिखी थी जो चार भाग में थी और काफ़ी लंबी थी, उन्हें पूर्ण करने के लिये उन्हें काफ़ी समय लगा था. और उसे बार बार लिखना पड़ा था.       इसी तरह लिओ टोल्सतोय का किस्सा था. उन्हें भी अपनी उपन्यास बार बार लिखनी पड़ी थी, जिस वजह से उन्हें काफ़ी समय लग गया था.        फिल्मों में एक टीम थी, राम से ब्रदर्स की जिन्हे फिल्मों में होरर लाने का