यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (45)

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                    :  : प्रकरण - 45 : :       आज से छह से भी ज्यादा दायके के पहले परिस्थिति बिल्कुल अलग थी. फिल्मों में कुछ ना कुछ संदेश होता था. लोगो को कुछ नया जानना सीखना मिलता था.        उस जमाने में वी शांताराम ने अपनी फिल्मों के जरिये नया मकाम प्राप्त किया था. कुछ अलग दिखाने का प्रयास किया था.      ' झनक झनक पायल बाजे ' , ' दो आंखे बारह हाथ ' और '  तूफान और दिया ' फिल्मों के जरिये उन्होंने ने हंगामा मचा