⭐ एपिसोड 60 — “हवेली का पहला हिसाब”कहानी — अधूरी किताबकिताब के गिरते ही पूरा कमरा एक अजीब-सी ठंडक से भर गया।जैसे किसी ने हवा में बर्फ का धुआँ घोल दिया हो।दीवारों पर टंगी पुरानी तस्वीरें हल्की-हल्की हिलने लगीं,मानो कोई अनदेखी शक्ति उन्हें जगा रही हो।निहारिका ठहर गई।उसकी सांसें तेज़ थीं, दिल धड़कनों से बाहर आ रहा था।आर्यन ने धीमे स्वर में कहा—“ये हवेली… जिंदा हो चुकी है।”अभिराज ने अपनी आँखें किताब पर टिकाए रखीं—“किताब की आखिरी लाइन…‘खून का हिसाब’—ये मज़ाक नहीं है।ये हवेली अब एक-एक पाप का कर्ज वसूल करेगी।”सिया एक कदम पीछे हटी, उसकी आवाज़ काँप रही थी—“लेकिन