⭐ एपिसोड 58 — "खून की वह निशानी"कहानी — अधूरी किताबहवेली के अँधेरे गलियारे में निहारिका तेज़ कदमों से चल रही थी।उसके दिल में जैसे किसी ने आग लगा दी हो।हर कदम के साथ उसका विश्वास टूट रहा था—पर उसी टूटे विश्वास में एक नई सच्चाई जन्म ले रही थी।उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन सांसें तेज़ थीं।उसे लग रहा था जैसे हवेली की हर दीवार उससे कुछ कहना चाहती हो।कुछ… जिसे उसने अब तक सुना नहीं था।पीछे से सिया की आवाज गूँजी—“निहारिका! प्लीज़ रुक जाओ!”लेकिन निहारिका ने सिर तक नहीं घुमाया।आज वह सिर्फ एक चीज चाहती थी—सच।--- सीढ़ियों का