यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (43)

  • 573
  • 156

                     : : प्रकरण - 43 : :        सुंदर काम करता था. उस से मुझे कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन काम करने के तरीके से मुझे नाराजगी थी. वह पूरा टाईम भाव के पीछे भागता रहता था. अप डेट लेता रहता था.        मैंने उस को समजाया था.        " पूरा दिन भाव के पीछे भागने की आवश्यकता नहीं है. सुबह मार्किट खुलते ही शेयर खरीद लेना. उस की मूवमेंट देख लेना. वह कहाँ तक जा सकता हैं. ऊपर जाता हैं तो टारगेट सेट