यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (40)

                    : : प्रकरण -40 : :        मेरी बहन की लड़की की शादी में मैं बड़ोदा गया था तब मेरी मुलाक़ात सुख लाल से हुई थी. वह छोटे बच्चों को अपनी रेकड़ी में बिठाकर उन्हें जहाँ जाना होता था वहाँ पहुंचाता था.         भाविका की लड़की की शादी खतम होने के बाद कोई साधन नहीं मिला था तो सुखलाल ने बिना कहे सब को रेकड़ी में बिठाकर अपने मुकाम पहुंचाया था, उस के लिये उस ने कोई पैसा नहीं लिया था.         सुख लाल