: : प्रकरण - 33 : : मैंने स्नेहा को मेरी हाथ के नीचे काम पर रखा था. उस के मेरा काम दूसरों के साथ कमला करती थी. वह बेवा थी. काफ़ी दुखी थी. इस स्थिति में वह किसी का अच्छा नहीं देख सकती थी. मैं स्नेहा का अच्छा ख्याल रखता था. वह बात उसे कांटो की तरह चुभती थी. उस की मजबूरी का फायदा उठाकर पैसों की लालच देखकर ज़ब चाहे तब उस का यौवन शोषण करता था. स्नेहा ने भी