: : प्रकरण : : 32 एक दिन मैं चर्नी रोड स्टेशन के ब्रिज से गुजर रहा था. तब किसी जानी पहचानी आवाज सुनकर मेरे पैरों को ब्रेक लग गई थी. मैंने मुड़कर पीछे देखा तो चौंक सा गया. क्षिप्रा किसी आदमी को पूछ रही थी. " चलना हैं? " बिल्कुल उसी अंदाज में वह आते जाते लोगो को पूछ रही थी, बिल्कुल आशावरी की तरह. मैं कुछ बोलूं या करुं उस के पहले घराक को