यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (30)

                       : : प्रकरण - 30 : :      मै स्नेहा को नियमित तौर से NGO में मिलने  जाता था. उस बहाने हमारे बीच सारी बातें होती थी. मैंने कभी नहीं सोचा था. मैं कभी दोबारा गरिमा को नहीं मिल पाउँगा, लेकिन हमारे लिये ईश्वर ने कुछ अलग ही सोचा था.       मैं एक बार गरिमा के NGO में गया था. उस वक़्त एक लड़का किसी अंधी औरत को लेकर वहाँ आया था. उसे देखकर मैं चकित सा ऱह गया था. वह मेरी पिताजी के परम मित्र की बेटी