: : प्रकरण - 28 :: कुछ दिन बाद मैंने अपने हाथों की उंगलिया दिखाई थी. जो नाखुनो से पुरी भरी पड़ी थी. यह देखकर म्युझिका चकित ऱह गई थी. उसने मुझे सवाल किया था. " हां! " मैंने एकाक्षरी जवाब दिया. " यह कैसे हो गया? " उस ने मुझे सहज सवाल किया. मैंने उसे जवाब दिया. " यह एक चमत्कार हैं जो एक दादी मा ने किया हैं. "