यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (22)

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                      : : प्रकरण : : 22         ' कीसी' के जाने के बाद मेरी जिंदगी में अंधेरा हो गया था.          आखिरी दिन मैं उस के साथ वी टी स्टेशन तक चल कर गया था.           मैं बहुत मायूस हो गया था.. उस वक़्त ' कीसी' ने मुझे आश्वस्त किया था.        " संभव भैया मेरा जोब छूटने से हमारे रिश्ते का अंत नहीं होता हैं. आप ज़ब चाहे तब अपनी बहन और भाई जैसे दोस्त को मिलने आ