यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (2)

                    :: प्रकरण :: 2      एक बार नानी मा की मार खाकर मैं तो ठिकाने आ गया था, लेकिन मेरा बड़ा भाई ने दोबारा स्कूल ना जाते हुए बाहर भटकना शुरू कर दिया. यह जानकर नानी मा ने उसे ढोर मार मारा था. और पडोशी के बंध, अंधेरे कमरे में उसे कैद कर दिया. उसे खाना पीना कुछ नहीं दिया. और वह बीमार पड़ गया.       उस के कई उपचार किये लेकिन उस की हालत में कोई सुधार नहीं आया.       एक दिन मैं स्कूल जाने के