Chapter 3 — विवाह में षड्यंत्र और उसके विफल होने की घटनाशादी का शुभ दिन तय हुआ, और सूरज ढलने से पहले ही मारवाड़ के राव मालदेव अपनी शाही बारात के साथ जैसलमेर की ओर रवाना हुए।जैसलमेर की रेतीली राहों पर जब वह बारात पहुँची, तो पूरे शहर में जैसे हलचल मच गई।घोड़ों के गले में बँधी घंटियाँ दूर तक गूँज रही थीं।हाथियों के माथे पर रंग-बिरंगी चित्रकारी चमक रही थी।ऊँटों की लंबी कतारें, राजपूत सैनिकों की चमकती कवच—ऐसी शान-ओ-शौकत जैसलमेर ने पहले कभी नहीं देखी थी।किले के बाहर फैला हुआ बारात का डेरा किसी छोटे—से नगर जैसा दिख रहा