वो इश्क जो अधूरा था - भाग 11

अपूर्व ने खिड़की की ओर देखा—जहाँ से वह छाया उसे घूर रही थी। धड़कनों की रफ़्तार तेज़ होती जा रही थी।वह धीरे-धीरे खिड़की के पास पहुँचा। पर वहाँ अब कुछ नहीं था। सिर्फ़ सन्नाटा... और हवाओं में बसी एक सिसकी।“तुम्हारा वक्त खत्म हो चुका है...” ये शब्द उसके कानों में गूंजते रहे।“पर क्यों?” वो बुदबुदाया । “मैंने क्या किया है?”इसी बीच हवेली के भीतर एक और दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।दरवाज़े के पार एक कमरा था, जिसमें दीवार पर एक पुराना चित्र टंगा था— रुख़साना और आगाज़ खान का।अपूर्व ने देखा—चित्र के नीचे एक ताज़ा लिखा हुआ नाम उभर आया था... “अन्वेषा” और उसके नीचे— “वो इश्क जो