*अदाकारा 54* उर्मिला दरवाज़े की ओर दौड़ी। उर्मिला को दरवाज़े की ओर दौड़ता देख वह व्यक्ति सतर्क हो गया।उसने जंप मारकर दौड़ती हुई उर्मिला के दोनों पैरों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिये।और उर्मिला ज़मीन पर औंधे मुँह गिर पड़ी।उसकी नाक से चोट लगने की वजह से खून बहने लगा।औंधे मुंह गिरने से उसके होंठ भी फट गए।दर्द के मारे वह चीत्कार उठी। काले कपड़े वाला व्यक्ति स्फूर्ति से ज़मीन से उठा और उर्मिला को अपने दोनों हाथोंसे फूलो की तरह उठाकर सोफ़े पर पटक दिया। "रानी।तेरी कोई भी ताकत या होशियारी मेरे आगे नहीं चलेगी