1. नई शुरुआत की हल्की रौशनी सुबह की पहली किरण जब दरभंगा की पुरानी हवेली की दीवारों से टकराई, तो हवा में अब कोई रहस्य नहीं था — बस शांति थी, और उस शांति में एक मधुर संगीत तैर रहा था। रूहाना ने बरामदे से बाहर झाँका — जहाँ कभी नीली धुंध फैली रहती थी, वहाँ अब सुनहरी ओस चमक रही थी। अर्जुन उसके पास आया, “अब हवेली सच में सो गई है, रूहाना।” वो हल्के से मुस्कराई, “हाँ… मगर जो कुछ इसने हमें दिया, वो ज़िंदा रहेगा।” अर्जुन ने उसकी हथेली थामी, “शायद