सोने का पिंजरा - 24

गाँव की रात.आसमान में चाँद की हल्की रोशनी और हवाओं में ठंडक. तालाब के किनारे से लेकर पहाडी तक फैली खामोशी में सिर्फ दिलों की धडकन सुनाई दे रही थी.शहवार ने कबीर को बुलाया था. वह सफेद दुपट्टे में, आँखों में सवाल लिए उसके सामने खडी थी.शहवार( धीमे स्वर में)कबीर. तुम जानते हो ना, हमारी मोहब्बत आसान नहीं है. मेरे घर वाले तुम्हारा नाम सुनते ही खून की कसम खा लेते हैं. हमारे खानदान की पुरानी दुश्मनी आज भी जिंदा है।कबीर की आँखों में आंधी थी. वह नजरे झुकाकर नहीं, बल्कि सीधे शहवार की आँखों में देखते हुए बोला—कबीर:मुझे उनकी