चुपके चुपके… एक खामोश प्यार

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गौतम और लक्षिता बचपन से ही एक ही मोहल्ले में पले-बढ़े थे। दोनों एक ही स्कूल गए, एक ही रास्ते से कॉलेज तक पहुँचे, मगर उनके रिश्ते की डोर हमेशा दोस्ती तक ही सीमित रही।लक्षिता एक बड़े जॉइंट फैमिली से थी। वह हमेशा सबका ख्याल रखने वाली, दादी की दवा से लेकर छोटे बच्चों के होमवर्क तक संभाल लेती। भगवान में गहरी श्रद्धा रखने वाली लक्षिता का दिल उतना ही सुंदर था जितनी वो दिखने में खूबसूरत थी।गौतम अक्सर मज़ाक में कह देता,“लक्षिता, अगर दुनिया में सच में अच्छे लोगों का अवार्ड मिलता, तो तू ही जीतती।”लक्षिता बस हल्की मुस्कान