मनहूस

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दोस्तों वर्तमान के समय में जो आजकल पत्नियां गुल खिला कर अख़बार और टीवी चैनलो की ब्रेकिंग बन कर चौका रही हैं ये सब देख कर दुःख तो होता ही हैं और शर्म से सर झुक भी जाता हैं अगर किसी की अंखों में नमक का नीर न होतो तो वो क्या इंसान हो सकता हैं... मैं तो नहीं ही कहूंगा खैर इन्ही घटनाओ को देखते हुए मेरी कलम भी चल पड़ी एक ऐसी कहानी को गढ़ने जिसे मुझे भी अपनी कलम का साथ देने को मजबूर होना पड़ा...तो चलिए दो मिनट का समय निकाल कर इस मनहूस की व्यथा