पहली मुलाकात - अध्याय 4

  • 225
  • 72

---अध्याय 4 – मुश्किलों की दस्तकदिन बीतते-बीतते मुकुंद कॉलेज की लय पकड़ने लगा था। सुबह की lectures, library का समय, और रात को terrace पर सपनों के बारे में सोचना उसकी आदत बन गई थी। लेकिन जीवन की राह कभी सीधी नहीं होती—और मुकुंद के सफ़र में भी एक नई कठिनाई दस्तक देने वाली थी।एक शाम जब मुकुंद library से लौट रहा था, हॉस्टल के गेट पर चपरासी ने उसे एक चिट्ठी थमाई। यह उसके गाँव से आई थी। उसने जैसे ही लिफ़ाफ़ा खोला, उसकी आँखें भर आईं।पिता ने लिखा था—“बेटा, इस बार फसल बहुत खराब हुई है। बाजार में