माफिया की नजर में - 13

माफ़िया की नज़र में – Part 13: "आखिरी बलिदान""कभी-कभी बलिदान सिर्फ़ जान का नहीं, बल्कि दिल का होता है। और वो दर्द ज़िंदगी से भी भारी पड़ता है।"अहाना का दिल अब जैसे थम सा गया था। पुरानी मिल का अंधेरा, गोलियों की गूंज, और रायान का खून से लथपथ ज़मीन पर गिरना—सब कुछ एक दर्दनाक हकीकत बन चुका था। निहारिका और विक्रम की नफ़रत भरी नज़रें, मायरा का अचानक आना, और पापा की आखिरी चिट्ठी—“मैंने ये दुनिया चुनी। तुम इसे मत चुनना”—उसे एक ऐसी राह पर खींच रही थी, जहाँ हर कदम का मतलब था जिंदगी या मौत।अहाना रायान