सिसकती वफ़ा: एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल दास्तान - 14

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                     भाग:14.               रचना:बाबुल हक़ अंसारीआग अब दैत्य की तरह चारों ओर भड़क चुकी थी।सर्वर रूम की दीवारें दरकने लगी थीं,और हर सेकंड मौत उनकी सांसों को घेर रही थी।आर्यन ने EMP ग्रेनेड को हथेली में दबाते हुए कहा —“एक बार ये फटा, तो हमें सिर्फ़ बीस सेकंड मिलेंगे… फिर सब खत्म।”आयशा काँपते हुए बोली —“बीस सेकंड में… क्या सच को बचाया जा सकता है?”अयान ने उसकी आँखों में देखा,और उसकी आवाज़ में पहली बार डर की जगह यकीन था —“सच को बचाना हमारी मोहब्बत से भी