भाग:9. रचना:बाबुल हक़ अंसारी "आख़िरी मंच का सच…"पिछले खंड से… "सच की सबसे बड़ी ताकत यही है… कि चाहे कितनी भी देर से आए, वो अपना रास्ता खुद बना लेता है।"आश्रम की शाम…आचार्य शंकरनंद की बांसुरी की धुन जैसे हर आत्मा को छूकर गुज़री।लेकिन उस धुन के बाद आई खामोशी, जैसे किसी तूफ़ान का इशारा थी।गुरु ने धीमे स्वर में कहा —"अब वक्त है कि मैं वो राज़ खोल दूँ…