पहली मुलाक़ात - भाग 4

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बारिश उस दिन ज़रा ज़्यादा ही तेज़ थी। बरेली की गलियाँ कीचड़ से भर चुकी थीं और आकाश जैसे किसी अधूरी पुकार का जवाब दे रहा था।आरव अपने कमरे में बैठा बार-बार फोन की स्क्रीन देख रहा था — कोई मैसेज? कोई कॉल?तीन दिन हो चुके थे। अंजली का कोई अता-पता नहीं था। कॉलेज से गायब, उसके घर के बाहर सन्नाटा और आरव के दिल में बेचैनी।जिस चिट्ठी के साथ अंजली ने जाने का फैसला किया था, वह उसकी बहादुरी का प्रमाण था — पर आरव के लिए, यह एक परीक्षा बन चुकी थी।और फिर… शाम करीब 7 बजे, गीले