न देखा, न सुना - 1

  • 318
  • 1
  • 117

भूमिका मेरी आयु 80 पार हो चुकी है मै अपनी आयु के अंतिम आयुखंड मे हूँ मुझे नाम यश या धन मे रुचि नहीं है ऐसे मे मेने अपने सबसे प्रिय विषय मेरे सद्गुरुदेव रमण महर्षि की जीवनी से लोगों का परिचय कराना चाहता हूँ मै बचपन से अध्यात्म मे रुचि रखता हूँ अतः मै एसे गुरु की तलाश मे था जो सिद्ध हो व मुझे दिव्य अनुभव करा सके धर्म की कथा कहानिया व भजन सुनाने वाले तो लाखो लोग मिल जाएगे किन्तु परमात्मा की दिव्यअनुभूति करने वाला लाखो करोड़ों मे कोई एक