महाराज अपने कक्ष में तैयार हो रहे हैं तभी एक सेवक उनके कक्ष में आता हैं।सेवक : " महाराज कि जय हो ! कवि कुलभूषण आपसे मिलने आए हैं।" महाराज सेवक को देखते हुए " ठीक है कविराज कुलभूषण को हमारे कक्ष में भेज दीजिए।"फिर सेवक कवि कुलभूषण को महाराज के कक्ष में ले आता है। महाराज कवि कुलभूषण को देखते हुए कहते हैं-" आईए कविराज बिराजिए।"और अपने सामने आसन की ओर संकेत करते हैं ।कवि कुलभूषण आसन पर बैठकर कहते हैं :" प्रणाम महराज हम चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर एक पुस्तक लिखना चाहते हैं कृपया करके आप इस कार्य