एक अनजानी रातहोटल की हिंसा और खून से भरी रात के बाद, दानिश अकेला अपने कमरे में आ गया। बाहर अभी भी हलचल थी, लेकिन अब उसे किसी की परवाह नहीं थी। वह थक चुका था—जिस्म से भी और रूह से भी।जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया, कमरे में घना अंधेरा था। उसने धीमे कदमों से बाथरूम की तरफ बढ़कर शावर चालू कर दिया। पानी की गर्म बूंदें उसके बदन पर गिरने लगीं, मानो उसकी थकान और गुनाह दोनों को धोने की कोशिश कर रही हों।कुछ देर बाद, टॉवल लपेटे हुए वह बाहर निकला। लेकिन जैसे ही उसने बिस्तर की