Kurbaan Hua - Chapter 12

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संजना ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसकी पलकों पर कुछ बूंदें ठहर गई थीं, जो बारिश की थीं या उसके मन की उलझनों की, वो खुद नहीं जानती थी।हर्षवर्धन ने धीरे-धीरे उसे अपनी बाहों में समेट लिया। संजना ने कोई विरोध नहीं किया, बस अपनी उंगलियां उसकी शर्ट में भींच लीं। उसके गर्म सांसों की तपिश हर्षवर्धन के गीले सीने से मिल रही थी। हवाएं अब भी तेज़ थीं, मगर दोनों के बीच एक सुकून भरी खामोशी थी।"मैंने बहुत इंतज़ार किया है इस पल का, संजना…" हर्षवर्धन ने फुसफुसाया।संजना ने अपनी आंखें खोलीं और हर्षवर्धन के चेहरे पर अपनी