भाग 3: वापसी और उपेक्षित संघर्ष पिछले भागों का सारांश:भाग 1 में हमने देखा कि राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने राजसी वैभव को त्यागकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की और अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की नींव रखी। भाग 2 में उनका सफर भारत से बाहर शुरू हुआ। उन्होंने काबुल में भारत की पहली निर्वासित सरकार स्थापित की और लेनिन, जर्मनी, तुर्की, जापान जैसे देशों से समर्थन लेने का प्रयास किया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सबसे खतरनाक क्रांतिकारियों में से एक घोषित कर दिया और उनके खिलाफ फाँसी का वारंट जारी कर