भाग 4 का सारांश: अर्जुन भले ही गाँव से भाग गया था, लेकिन वह श्राप से मुक्त नहीं हुआ था। उसकी छाया अजीब हरकतें करने लगी थी, और कभी-कभी उसे अपने आसपास अदृश्य ताकतों की मौजूदगी का अहसास होता। जब उसने आईने में खुद को मुस्कुराते देखा—जबकि वह डर के मारे कांप रहा था—तब उसे यकीन हो गया कि यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि एक भयानक सच्चाई है। आखिरकार, अर्जुन ने गाँव लौटने का फैसला किया। बाबा हरिदेव पहले से ही उसके लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे। बाबा ने उसे बताया कि देवता अब उससे क्रोधित हो चुके हैं,