यथार्थसंजना एकदम से हडबडाहठ में बिस्तर से नीचे उतरी दबे पाँव हाॅल में पहुंची देखा कि हर्षवर्धन तो वहां नहीं है | महौल खाली देख वो बोली ", ये आदमी कहा गया ( आवाज लगाते हुए ) हैलो..... संजना कि कई बार आवाज लगाई लेकिन उसे मालूम हुआ कि हर्षवर्धन शायद वहां नहीं था | ये देख संजना बडी खुश हुई और वो तुरंत ही सामने के खुले दरवाजे से बाहर निकली देख कि सामने तो एक भयानक जंगल था | उसे डर लग रहा था| सोच रही थी कि कही कोई जंगली जानवर मिल गया तो लेकिन उसने हिम्मत