कुछ महीनों बाद, गाँव की हवेली अब एक पुरानी, सुनसान इमारत बन चुकी थी। वहाँ अब कोई आत्मा नहीं थी, कोई अजीब घटनाएँ नहीं होती थीं, और गाँव वाले भी धीरे-धीरे उसे भूलने लगे थे। लेकिन वरुण के लिए, यह सब कभी हुआ ही नहीं था। वह अब एक अलग शहर में था, एक नई ज़िंदगी जी रहा था। उसके पास एक नौकरी थी, दोस्त थे, लेकिन जब भी कोई उससे उसके अतीत के बारे में पूछता, वह बस कंधे उचका देता। उसे खुद भी नहीं पता था कि वह पहले कौन था, कहाँ से आया था। कभी-कभी, उसे अजीब सपने आते।