काली किताब - 6

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वरुण के शरीर में अब एक अजीब ऊर्जा बह रही थी। उसका दिमाग साफ महसूस कर सकता था कि आसपास की हवा में हलचल हो रही है, पेड़ों की फुसफुसाहट अब सिर्फ हवा की सरसराहट नहीं थी—मानो वे उससे कुछ कह रहे हों। यह सब एक नया अहसास था, लेकिन इसके साथ ही एक अजीब सा डर भी था।  वह धीरे-धीरे उठा और मंदिर के चारों ओर देखा। अब उसे हर चीज़ पहले से अलग लग रही थी—जैसे वह दुनिया को किसी और नजरिए से देख रहा हो। उसकी आँखें अपने आप उन प्रतीकों को समझने लगीं, जो पहले सिर्फ रहस्यमयी