सब लोग इसी उलजन मे थे की अब आगे क्या किया जाये | बिना दुल्हन के बारात वापस जा नहीं सकती थी और मुस्कान शादी छोड़कर भाग गए थी | " मुस्कान नहीं तो कोई और सही, किसी दूसरी लड़की को मुस्कान की जगह मंडप मे बैठना होगा, जिससे शादी भी पूरी हो जाये और बदनामी भी ना हो " अविनाश जी ने अपना फैसला सुनाया |" अरे पर ऐसे कैसे किसी भी लड़की को हम अपनी बहु बना सकते है, और आखिर ये हमारे बेटे