अगली सुबह...खिड़की से आती सूरज की हल्की किरणें कमरे में बिखर रही थीं। ठंडी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट के बीच अर्निका की नींद खुली। उसने घड़ी देखी—सुबह के 6:30 बजे थे।वह धीरे से उठी, बालों को पीछे किया और बालकनी में आ गई। मुंबई की ऊँची इमारतों पर पड़ती धूप, सड़कों पर दौड़ती गाड़ियाँ और समंदर से आती ताज़ी हवा… एक नई शुरुआत का एहसास करा रही थी।अर्निका ने गहरी सांस ली और मन ही मन सोचा, "आज से सबकुछ नया—नई जगह, नया सफर, नए लोग।"तभी पीछे से अद्विक की आवाज़ आई, "गुड मॉर्निंग कुकी! इतनी जल्दी उठ गई?"अर्निका