यह मैं कर लूँगी - भाग 14

  • 327
  • 144

(भाग-14) सुबह होते ही मैं घर चला आया। उसने रोका नहीं और मुझे भी कोई काम न था। फिर एक महीने बाद लौटा जब प्रेस वाले ने बुलाया, पत्रिका तैयार हो गई तो...। अगले दिन बंडल बनाकर पहुंचा तो पता चला, उसका फिर तबादला हो गया है! एक धक्का-सा लगा और उस दिन तो मैंने खैर, दो-तीन जगह जाकर 20 पत्रिकाएं जैसे-तैसे भेज दीं लेकिन अगले दिन उसे फोन किया और पता चला कि वह आईआईटी वाले डाकखाने पर पहुंच गई है तो बंडल लेकर वहीं जा पहुंचा। देखकर तसल्ली हुई कि वह वहां पर मिल गई।नमस्कार चमत्कार के बाद