यह मैं कर लूँगी - भाग 13

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(13) प्रेम सबसे पवित्र वस्तु है। प्रेम आत्मा से होता है। शरीर से तो खिलवाड़ होता है जिसे लोग प्रेम के नाम पर यूज़ करते हैं। प्रेम मजबूर नहीं करता, प्रेम मजबूत करता है। प्रेम स्वतंत्रता चाहता है। प्रेम अपनी मर्जी से होता है, प्रेम में शर्तें नहीं लागू होती, ये अनलिमिटेड होता है। प्रेम जब भी होता है जोरदार होता है, धुआंधार होता है। ये जाति-पात, ऊँच-नीच, छोटा-बड़ा कुछ नहीं देखता बस हो जाता है। प्रेम में उनके झुमके चाँद-तारे लगते हैं। प्रेम में उनके मेहंदी वाले हाँथ 'बनारसी साड़ी का बॉर्डर' लगते हैं। प्रेम में उनका 'सुनो' कहना