हर्षवर्धन ने हल्की मुस्कान के साथ टीवी की तरफ देखा और फिर दोबारा उसकी तरफ झुका, "अरे, तुम ही तो कह रही थी कि घूरना बंद करूं, तो मैंने बस ऑप्शन दिया।"सनजना ने तकिया उठाकर उसकी तरफ फेंक दिया, "बकवास बंद करो और ठीक से बैठो!"हर्षवर्धन ने तकिया पकड़ लिया और मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक से तो मैं तब बैठूंगा जब तुम मेरे पास आकर बैठोगी।""हर्गिज़ नहीं!" सनजना तुरंत पीछे हट गई।हर्षवर्धन ने उसकी ओर देखते हुए धीरे से कहा, "डर रही हो?""मैं... मैं क्यों डरूंगी?" उसने खुद को संभालते हुए कहा।"तो फिर आ जाओ पास," हर्षवर्धन ने मजाकिया लहजे