रूह से रूह तक - चैप्टर 8

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रात गहराती जा रही थी, लेकिन दादी और बाकी परिवार के लोगों ने अस्पताल में ही रुकने का फैसला किया। उन्होंने पहले ही वीआईपी वार्ड ले लिया था, जहाँ अटेंडेंट के लिए सोफा और बेड की व्यवस्था थी। माहौल पूरी तरह शांत था, बस बीच-बीच में मॉनिटर की बीप-बीप की आवाज़ गूंज रही थी।दादी कुर्सी पर बैठी थीं, लेकिन उनकी आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उनके ज़ेहन में बार-बार वही चेहरा उभर रहा था—सुबह वाली लड़की का।"क्या सच में वह अर्निका त्रिपाठी थी?" उन्होंने खुद से सवाल किया।थोड़ी देर बाद, उनकी बहू ने धीरे से कहा, "माँ, आपको